
माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा
पावन लखुंदर नदी के तट पर स्थित महाभारत कालीन स्वयंभू शक्तिपीठ (आगर मालवा, म.प्र.)
मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में पावन लखुंदर नदी के शांत तट पर स्थित माँ बगलामुखी मंदिर विश्व के सर्वाधिक प्रतिष्ठित एवं जाग्रत तांत्रिक सिद्धपीठों में अग्रणी है। द्वापर युग में महाभारत युद्ध में विजय हेतु धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर इसी स्थान पर माँ पीताम्बरी की कठोर तपस्या की थी। यहाँ माँ स्वयंभू त्रिमुखी स्वरूप में माँ महालक्ष्मी व माँ महासरस्वती संग प्रतिष्ठित हैं।
मंदिर दर्शन एवं दैनिक आरती समय
माँ बगलामुखी नलखेड़ा सिद्धपीठ के कपाट खुलने, आरती एवं दर्शन की दैनिक प्रामाणिक समय सारिणी
मंगला आरती • प्रातः 06:00 बजे
प्रातःकालीन प्रथम दिव्य स्वर्ण व पीताम्बरी श्रृंगार, वेद मंत्र पाठ, शंख ध्वनि एवं मंगला पूजन आरती। कपाट दर्शन प्रारंभ।
संध्या महाआरती • सायं 07:30 बजे
सांध्यकालीन शंखनाद, अखंड हवन कुंड दर्शन, 108 दीप महाआरती, विशाल घंटा-नाद एवं यजमान महासंकल्प।
मंगला आरती (प्रथम दिव्य श्रृंगार)
06:00 AMप्रातःकालीन प्रथम दिव्य श्रृंगार, शंख ध्वनि व मंगला पूजन आरती। कपाट दर्शन प्रारंभ।
पंचामृत अभिषेक व पीताम्बरी श्रृंगार
08:30 AMहल्दी-कुमकुम महाअर्चन, पीत वस्त्र व दिव्य स्वर्ण मुकुट धारण। इस समय दर्शन का विशेष आध्यात्मिक फल है।
मध्याह्न भोग आरती
12:00 PMपीत नैवेद्य समर्पण (बेसन लड्डू, केसर भात व केसर खीर) एवं मध्याह्न आरती।
संध्या महाआरती (शंखनाद व 108 दीप)
07:30 PMसांध्यकालीन शंखनाद, अखंड हवन कुंड दर्शन, 108 दीप महाआरती, विशाल घंटा-नाद व ढोल वादन।
शयन आरती व पट मंगल
09:30 PMपुष्प अर्पण, क्षमा याचना एवं रात्रि विश्राम हेतु गर्भगृह के कपाट मंगल (विशेष पर्वों पर 11:00 PM)।
प्रतिदिन कपाट खुले रहते हैं।
यज्ञवेदी पर नियमित अनुष्ठान संपन्न।
चैत्र, शारदीय व गुप्त नवरात्रि में।
माँ बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा: प्रत्यक्ष वीडियो दर्शन
इस पावन वीडियो में विश्वविख्यात माँ बगलामुखी सिद्धपीठ नलखेड़ा के मुख्य शिखर, सिंहद्वार, परिक्रमा पथ, ८४ खंभों के सभामंडप एवं लखुंदर नदी तट का साक्षात विहंगम दर्शन करें।

मंदिर शिखर, सिंहद्वार, लखुंदर नदी तट एवं पावन परिक्रमा का प्रत्यक्ष अनुभव
माँ बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा • पावन परिक्रमा व मंदिर दृश्य
सिद्धपीठ नलखेड़ा (आगर मालवा) • द्वापर कालीन स्वयंभू शक्तिपीठ
वीडियो में लखुंदर नदी तट पर स्थित भव्य स्वर्ण कलश युक्त मुख्य मंदिर का अलौकिक विहंगम दृश्य एवं सिंहद्वार की भव्यता दिखाई देती है।
द्वापर कालीन महाराज युधिष्ठिर की तपस्या स्थली, सदियों से प्रज्वलित अखंड दीप ज्योति एवं मुख्य सभामंडप की पावन परिक्रमा का अनुभव।
मंदिर के ठीक पीछे प्रवाहित उत्तरवाहिनी पावन लखुंदर नदी का शांत संगम घाट एवं प्राकृतिक पावन आध्यात्मिक ऊर्जा का सजीव वातावरण।
नलखेड़ा में व्यक्तिगत दर्शन, हवन अथवा महाअनुष्ठान कराने हेतु संपर्क करें:
माँ पीताम्बरी अमृत स्तुति व शंख ध्वनि
हवन कुंड नाद व शंख ध्वनि सुनें
माँ बगलामुखी के ३ दिव्य दर्शन (नलखेड़ा गर्भगृह)
प्रातः, मध्याह्न एवं सांध्यकालीन दिव्य श्रृंगार एवं आरती छायाचित्र

माँ पीताम्बरा दिव्य स्वर्ण श्रृंगार (प्रातः दर्शन)
माँ बगलामुखी के दिव्य त्रिमुखी स्वरूप का प्रातःकालीन अलौकिक स्वर्ण मुकुट एवं पीताम्बरी श्रृंगार दर्शन।
गर्भगृह त्रिशक्ति दर्शन एवं विग्रह स्वरूप
विश्व का एकमात्र ऐसा सिद्ध शक्तिपीठ जहाँ एक ही पावन वेदी पर माँ बगलामुखी के साथ धनदात्री महालक्ष्मी एवं ज्ञानदात्री महासरस्वती स्वयंभू रूप में प्रतिष्ठित हैं:
माँ बगलामुखी (पीताम्बरा)
स्वर्ण मुकुट • पीत वस्त्र • जिह्वा स्तम्भन स्वरूपाआध्यात्मिक फल: समस्त शत्रुओं का स्तम्भन, वाक्सिद्धि, न्यायालयीन विजय, असाध्य संकट निवारण एवं अमोघ आत्मरक्षा।
माँ महालक्ष्मी
कमलासन विराजित • अष्टसिद्धि प्रदायिनीआध्यात्मिक फल: धन, धान्य, व्यापारिक समृद्धि, स्थिर ऐश्वर्य, राजलक्ष्मी तथा दरिद्रता नाश।
माँ महासरस्वती
श्वेत वस्त्र धारिणी • वीणा वादिनी स्वरूपाआध्यात्मिक फल: विद्या, ज्ञान, तीक्ष्ण बुद्धि, आध्यात्मिक विवेक एवं समस्त कलाओं में पारंगतता।
नलखेड़ा सिद्धपीठ का विस्तृत इतिहास (५ अध्याय)
पौराणिक ग्रंथों, शाक्त आगम एवं महाभारत कालीन परंपरा के अनुसार सिद्धपीठ का संपूर्ण महात्म्य:
माँ बगलामुखी कौन हैं?
माँ बगलामुखी सनातन हिंदू धर्म की दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। पीले रंग की प्रियता के कारण इन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है। मान्यता है कि वे समस्त अनिष्ट, शत्रु-बाधा, दुष्ट बुद्धि और प्रलयंकारी संकटों को स्तंभित (रोक) कर अपने शरणागत भक्तों की रक्षा करती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, सत्ययुग में जब एक भीषण तूफ़ान ने संपूर्ण सृष्टि को नष्ट करने का प्रयास किया, तब जगत की रक्षा हेतु भगवान विष्णु ने सौराष्ट्र में हरिद्रा सरोवर के तट पर कठोर तपस्या की और वहीं हरिद्रा सरोवर से पीताम्बरा माँ बगलामुखी का दिव्य प्राकट्य हुआ।
महाभारत कालीन ऐतिहासिक मान्यता
लोक-मान्यता और परंपरा के अनुसार, द्वापर युग में कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान जब पांडव गंभीर संकट में थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने महाराज युधिष्ठिर को नलखेड़ा की लखुंदर नदी के तट पर स्थित इस जाग्रत स्थान पर माँ बगलामुखी की आराधना करने का निर्देश दिया था। युधिष्ठिर ने यहाँ कठोर तप और अनुष्ठान संपन्न कर माँ से अजेय विजय का वरदान प्राप्त किया और कौरव सेना पर विजय ध्वज फहराया।
८४ खंभों की छत एवं मंदिर का स्वरूप
नलखेड़ा मंदिर का वास्तु अत्यंत चमत्कारी और प्राचीन है। सभामंडप की छत कुल 84 खंभों पर टिकी हुई है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु यहाँ 84 खंभों के नीचे बैठकर माँ के मंत्रों का जाप करते हैं, वे 84 लाख योनियों के आवागमन से मुक्ति पा जाते हैं। मंदिर में निरंतर प्रज्वलित रहने वाला अखंड दीपक सदियों से भक्तों के अंधकार को दूर कर रहा है।
साधना एवं मिर्ची हवन परंपरा
नलखेड़ा सिद्धपीठ भारत के प्रमुख तंत्र-साधना केंद्रों में गिना जाता है। यहाँ का हवन कुंड निरंतर जाग्रत रहता है। जब यजमान पर अत्यंत गंभीर शत्रु संकट, झूठे मुकदमे या गुप्त तंत्र का षड्यंत्र होता है, तब विद्वान ब्राह्मणों द्वारा यहाँ विशेष पीली सरसों, नीम समिधा एवं लाल मिर्च की विशेष शास्त्र सम्मत आहुतियां प्रदान की जाती हैं।
प्रमुख पर्व एवं मेला उत्सव
वैशाख शुक्ल अष्टमी के दिन मनाई जाने वाली बगलामुखी जयंती यहाँ का सबसे भव्य और प्रमुख उत्सव है। इस दिन देश भर से लाखों श्रद्धालु, साधक और पीताम्बरी भक्त नलखेड़ा पहुँचते हैं। इसके अतिरिक्त चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि एवं दोनों गुप्त नवरात्रियों में यहाँ 9 दिनों तक अखंड महायज्ञ एवं शतचंडी पाठ आयोजित होते हैं।
मंदिर दर्शन नियम, वेशभूषा एवं पूजन सामग्री
सिद्धपीठ की मर्यादा एवं पवित्रता बनाए रखने हेतु समस्त श्रद्धालुओं से निम्नलिखित नियमों का पालन करने का अनुरोध है:
पारंपरिक शालीन वस्त्र पहनें। पीला वस्त्र (पीला कुर्ता, धोती, पीली साड़ी) धारण करना माँ पीताम्बरी की कृपा दृष्टि हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है।
पीला कनेर पुष्प, साबुत हल्दी की गांठ, पीली चुनरी, नारियल, पीला पेड़ा/बेसन लड्डू तथा शुद्ध गाय का घी अर्पण किया जाता है।
गर्भगृह के अंदर फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी एवं मोबाइल का उपयोग पूर्णतः वर्जित है। बाहर सभामंडप से दर्शन सुलभ है।
मंगलवार, शनिवार, अष्टमी, चतुर्दशी, पूर्णिमा तथा नवरात्रि के दिनों में दर्शन व हवन का अनंत गुना फल मिलता है।
नलखेड़ा तीर्थ यात्रा या हवन हेतु पंडित जी से संपर्क करें
मंदिर दर्शन समय, विशेष पूजा, दशांश हवन, लाइव दर्शन एवं संकल्प व्यवस्था हेतु पूज्य पं. भोलाराम शास्त्री जी से सीधे फोन या व्हाट्सएप पर बात करें।